A HISTORY OF INDIAN PHILOSOPHY – 2nd Presentation

A HISTORY OF INDIAN PHILOSOPHY – Volume 1st (Serialised Presentation – 2nd) By Late Dr. Surendranath Dasgupta 1922 AD Extracts from the Preface     A work containing some general account of the mutual relations of the chief systems is necessary for those who intend to pursue the study of a particular school. This is,… Read More

भगवदितिपदस्य परिभाषा (गुरुण्डाऽवृत्ति:) / Definition of ‘Bhagavān’ / ‘भगवान्’ शब्द की परिभाषा (अंग्रेजी आवृत्ति)

  भगवदितिपदस्य परिभाषा (गुरुण्डाऽवृत्ति:) / Definition of ‘Bhagavān’ / ‘भगवान्’ शब्द की परिभाषा (अंग्रेजी आवृत्ति)       योनि, काम, वीर्य, इच्छा, माहात्म्य, यत्न, मोक्ष, रवि/अर्क (yoni, kāma, vīrya, icchā, māhātmya, yatna, mokṣa, ravi/arka) —   1) ‘yoni’ (female genital organ – indicating feminine divine energy; it can, alternatively, mean cause or कारण/हेतु too as… Read More

श्रीव्रजभक्तिरससिद्धान्तसारसङ्ग्रह: (प्रथमांश:) / শ্রীব্রজভক্তিরসসারসংগ্রহ: (প্রথমাংশ:) / श्रीव्रजभक्तिरससिद्धान्तसारसङ्ग्रह – भाग १ / Śrī-vraja-bhakti-rasa-siddhānta-sāra-saṅgraha (Essential Collection of the Principles of the Succulent Mellows of Vraja-bhakti) – Pt. 1

एतद्विषयिणीनां जिज्ञासानां जिज्ञासुभि: प्रस्तुतिकरणं समाधानार्थं स्वागतार्हं खल्वेव । / इस विषय पर केन्द्रित समस्त जिज्ञासाओं के प्रस्तुतिकारण का – समाधानार्थ – भरपूर स्वागत है । / All queries concentrated on this subject for clarification and their resultant presentation is most welcome.   श्रीव्रजभक्तिरससिद्धान्तसारसङ्ग्रह: (प्रथमांश:) / শ্রীব্রজভক্তিরসসারসংগ্রহ: (প্রথমাংশ:) / श्रीव्रजभक्तिरससिद्धान्तसारसङ्ग्रह – भाग १ / Śrī-vraja-bhakti-rasa-siddhānta-sāra-saṅgraha (Essential… Read More

आर्यसमाजमतखण्डनम् – २  / आर्य समाज के मत का खण्डन  – २ / Confutation of the views of Ārya-samāja — Pt. II 

“आर्यसमाजीयों को यह भी समझ लेना चाहिये कि धर्म का तर्कसङ्गत होना आवश्यक नहीं, पर तर्क का धर्मसङ्गत होना आवश्यक है । वैसे ही धर्म को जड-विज्ञान सम्मत होना आवश्यक नहीं, परन्तु जड-विज्ञान को धर्म-सम्मत होना आवश्यक है! क्यों? क्योंकि यदि ऐसा नहीं स्वीकारा गया तब तो जड-विज्ञान के नियम भी कुछ ही काल के… Read More

क्या सद्गुरु की प्राप्ति करना अत्यावश्यक है या वैकल्पिक है – परब्रह्म (श्रीभगवान्) व शब्दब्रह्म (वेदादिशास्त्र) की समुपलब्धि व समधिगम के लिये? / Is the acceptance of a sadguru very much essential or optional – for the obtainment of God and the factual assimilation of the scriptural import? (Only Hindi version)

क्या सद्गुरु की प्राप्ति करना अत्यावश्यक है या वैकल्पिक है – परब्रह्म (श्रीभगवान्) व शब्दब्रह्म (वेदादिशास्त्र) की समुपलब्धि व समधिगम के लिये?     १) “यस्य देवे पराभक्ति: यथा देवे तथा गुरौ । तस्यैते कथिता ह्यर्था: प्रकाशन्ते महात्मनः।।“  — श्वेताश्वतर उपनिषद् ६.२३ । — अर्थात् जिसकी इष्टदेव में पराभक्ति (साध्या प्रेमभक्ति) है तथा वैसी ही… Read More

Conventional Gauḍīya Vaiṣṇavism supports the traditional view on Vedic varṇāśrama.

    Śrīmad-bhāgavatam 5.4.13 –   yavīyāṁsa ekāśītir jāyanteyāḥ pitur ādeśakarā mahā–śālīnā mahā–śrotriyā yajña-śīlāḥ karma-viśuddhā brāhmaṇā babhūvuḥ.   Misinterpreted by ISKCON’s BBTI – “From this verse we have good information of how the castes are qualified according to quality and work. Ṛṣabhadeva, a king, was certainly a kṣatriya. He had a hundred sons, and out of these,… Read More

श्वः भैम्यैकादशी / कल भैमी एकादशी है / Tomorrow is Bhaimī Ekādaśī.

अथ महत्त्वपूर्णा सूचनेयम् –   श्वः (ख्रिष्ट्रपञ्जिकानुसारेण फरवरीमासस्य अष्टादशमे दिनाङ्के) माघमास्यस्य शुक्लपक्षस्यैकादश्या: भैम्या: वर्त्तत उपवास इति हरिप्रीत्यर्थम् ।   भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वराणामाज्ञया   ***   यह महत्त्वपूर्णा सूचना –   आगामी कल (ख्रिस्ति पञ्जिकानुसार फरवरी मास का अठारहवा दिन) माघमास के शुक्ल पक्ष की भैमी एकादशी का उपवास विधेय है श्रीहरि के प्रीत्यर्थ ।   भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर की… Read More

क्या वेदादि ग्रन्थों में वर्णित विष्णु आदि सञ्ज्ञाएँ केवल प्रकृति के अस्तित्व की वाचिका है या उन विष्णु आदि देवों की वाचिका है? / Some other clarifications regarding the ultimate supremacy of Śrī Viṣṇu.

क्या वेदादि ग्रन्थों में वर्णित विष्णु आदि सञ्ज्ञाएँ केवल प्रकृति के अस्तित्व की वाचिका है या उन विष्णु आदि देवों की वाचिका है?   जिन लोगों को मत में वेदब्राह्मणादि ग्रन्थों में जिन विष्णु, रुद्र, इन्द्रादि सञ्ज्ञाओं का उल्लेख हुआ है, वे सञ्ज्ञाएँ पौराणिक व आगम ग्रन्थो में वर्णित विष्णु, रुद्र आदि देवताओं से पृथक्… Read More

१/1) अयं शुभ समाचारः / यह शुभ समाचार / This good news २/2) वेदान्तप्रशिक्षणम् — प्रथम: पाठः / वेदान्त का प्रशिक्षण – पहला पाठ / Vedānta Lesson — Pt. 1 ३/3) प्रथमपाठस्य प्रश्नमालेयम् समूहस्य सदस्यानां कृते / पहले पाठ की यह प्रश्नमाला समूह के सदस्यों के लिये / Question series on the first lesson for… Read More