आर्यसमाज के द्वारा श्रीमद्भागवतादि पुराणों में वर्णित नन्दनन्दन व्रजस्थ/गोकुलस्थ गोप-गोपीवृन्द के साथ रमण करने वाले श्रीश्यामसुन्दर कृष्ण के ऊपर किये गए आक्षेपो का आमूलचूल ध्वंस ।

  आर्यसमाज के द्वारा श्रीमद्भागवतादि पुराणों में वर्णित नन्दनन्दन व्रजस्थ/गोकुलस्थ गोप-गोपीवृन्द के साथ रमण करने वाले श्रीश्यामसुन्दर कृष्ण के ऊपर किये गए आक्षेपो का आमूलचूल ध्वंस । (This article was, originally, published in BRVF’s WhatsApp groups around 19th of June 2016 AD. But, due to plagiarism, it is being published here to show its true… Read More

Unearthing the True History of Emperor Śālivāhana Pramara (Only in Hindi) / सम्राट् शालिवाहन प्रमर के सत्य इतिहास का उद्घाटन

Unearthing the True History of Emperor Śālivāhana Pramara (Only in Hindi) / सम्राट् शालिवाहन प्रमर के सत्य इतिहास का उद्घाटन       ©Copyright इतिहासकार कुमारी सुश्री मनीषा अथवा मणिकर्णिका सिंह ‘आर्या क्षात्रकन्या’ (मेडता, राजपूताना/मरुधर/राजस्थान + कालिकाता, पश्चिम बङ्गाल/गौडदेश + बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय, वाराणसी/काशी, पूर्वाञ्चल, आर्यावर्त्त, उत्तरप्रदेश, भारत) की कलम से लिखे गए ग्रन्थ विश्वविजेता… Read More

Pātañjala-yoga-dārśanam + Advaitins + Laukika-nāṭya-śāstram + śuddha-bhakti-rasa-siddhāntaḥ of the Gauḍīyas/Caitanyāites (in Sanskrit, Hindi and English)

Pātañjala-yoga-dārśanam + Advaitins + Laukika-nāṭya-śāstram + śuddha-bhakti-rasa-siddhāntaḥ of the Gauḍīyas/Caitanyāites (in Sanskrit, Hindi and English) पातञ्जलसूत्रविनिर्दिष्टेश्वरस्य निर्विशेषत्वमयौक्तिकं निर्विशेषब्रह्माद्वैतवेदान्तिनां पक्षेऽपि / अद्वैतवेदान्तिनां पक्षे तु यत्कल्पितभक्तित्वं कल्पितद्वैतं तच्च निरस्तम् / लौकिकनाट्यशास्त्रस्यपञ्चमवेदत्वं निराकृतं भगवद्भक्तिरतेर्चिदानन्दरसमयत्वात्तद्भक्ते: भगवत्स्वरूपभूतह्लादिनीशक्तिपरिणतिविशेषत्वाच्च / पातञ्जलयोगसूत्रकथित ईश्वर के निर्विशेषत्व की अयौक्तिकता निर्विशेषब्रह्मवेदान्तियों के मत में भी / अद्वैतवेदान्तियों के द्वारा स्वीकृत कल्पितद्वैत व उस पर आश्रित कल्पितभक्तित्व… Read More

त्रिविधा अलौकिकी शृङ्गार-रति की परिभाषाओं व दृष्टान्तों के उपर विवेचन + माधुर्य एवं ऐश्वर्य की परिभाषा + पञ्चमुख्यभक्तिरसों में शृङ्गार का श्रेष्ठत्व / Elucidation on the definitions and examples of the triple divinely aesthetic erotic rati + the definitions of Mādhurya & Aiśvarya + the pre-eminence of Śṛṅgāra among all the five primary mellows of devotion

त्रिविधा अलौकिकी शृङ्गार-रति की परिभाषाओं व दृष्टान्तों के उपर विवेचन + माधुर्य एवं ऐश्वर्य की परिभाषा + पञ्चमुख्यभक्तिरसों में शृङ्गार का श्रेष्ठत्व / Elucidation on the definitions and examples of the triple divinely aesthetic erotic rati + the definitions of Mādhurya & Aiśvarya + the pre-eminence of Śṛṅgāra among all the five primary mellows of… Read More

श्रीमद्भागवतस्य ज्ञानसाधनत्वादपि परमुपादेयत्वं रसस्वरूपेण कैवल्यमभिव्याप्यत्वात्

श्रीमद्भागवतस्य ज्ञानसाधनत्वादपि परमुपादेयत्वं रसस्वरूपेण कैवल्यमभिव्याप्यत्वात् (केवल संस्कृत में / Only in Sanskrit)       १) प्रश्न: —   प्रमाणं नाम (यथावत्) ज्ञानसाधनमेव वा उत किमपि अन्यद्वैशिष्ट्यमस्ति वा ? प्रमाणस्य परमं प्रयोजनं किम् ?     १) उत्तरम् –   गौडवैष्णवमते तु श्रीमद्भागवतं प्रमाणममलमेतत्सम्प्रदायप्रवर्त्तकैः श्रीमच्चैतन्यदेवैः यच्च विनिर्दिष्टं यथा – “आराध्यो भगवान्व्रजेशतनयस्तद्धाम वृन्दावनं रम्या काचिदुपासना व्रजवधूवर्गेण… Read More

अपौरुषेय: वेदपञ्चकः / अपौरुषेय पाँच वेद / Trans-human five Vedas (mostly, in Sanskrit & Hindi, with scarce English)

  अपौरुषेय: वेदपञ्चकः / अपौरुषेय पाँच वेद / Trans-human five Vedas (mostly, in Sanskrit & Hindi, with scarce English)       अवतारणा –   अत्रैवावलोकनीयमेतत् – “प्रत्यक्षञ्चानुमानञ्च शास्त्रं च विविधागमम् । त्रयं सुविदितं कार्यं धर्मशुद्धिमभीप्सता ॥“ – मनुस्मृतौ १२.१५ — तथापि गौडवैष्णवाचार्यै: श्रीलजीवगोस्वामिपादै: तत्वसन्दर्भीयं व्याख्यानमेतत् – तत्त्वसन्दर्भे अनुच्छेदेषु ९ + १० + ११  – “तत्र पुरुषस्य… Read More

करपात्रमतनिरसनम् – चतुर्थांश: / करपात्रीय मत का अपगम – ४था भाग (अधिकांशत: संस्कृत आवृत्ति — किञ्चित् हिन्दी व गुरुण्डा/अङ्ग्रेजी/यावनी के संमिश्रण के साथ) / Refutation of the views held by Late Svāmī Karapātrī – 4th Pt. (Primarily Sanskrit version with a bit of Hindi and English interwoven)

करपात्रमतनिरसनम् – चतुर्थांश: / करपात्रीय मत का अपगम – ४था भाग (अधिकांशत: संस्कृत आवृत्ति — किञ्चित् हिन्दी व गुरुण्डा/अङ्ग्रेजी/यावनी के संमिश्रण के साथ) / Refutation of the views held by Late Svāmī Karapātrī – 4th Pt. (Primarily Sanskrit version with a bit of Hindi and English interwoven)           विद्वद्वर: विश्वासो वासुकि:… Read More

करपात्रानुरागयोर्वृथागल्पनिरास: — तृतीयांश: / दिवङ्गत स्वामी करपात्री एवं अनुरागकृष्णशास्त्री कथावाचक वृन्दावनीय के वृथा गल्प का निरास (दार्शनिक संस्कृत में) / Confutation of the views upheld by Late Karapātrī Svāmī & Anurāgakṛṣṇa Śāstrī Kathāvācaka Vṛndāvanīya (Only in philosophical Sanskrit)

करपात्रानुरागयोर्वृथागल्पनिरास: — तृतीयांश: / दिवङ्गत स्वामी करपात्री एवं अनुरागकृष्णशास्त्री कथावाचक वृन्दावनीय के वृथा गल्प का निरास (दार्शनिक संस्कृत में) / Confutation of the views upheld by Late Karapātrī Svāmī & Anurāgakṛṣṇa Śāstrī Kathāvācaka Vṛndāvanīya (Only in philosophical Sanskrit)       अनुरागार्भकस्य वृथा गल्प: —       करपात्रानुरागयोर्वृथागल्पनिरास: — तृतीयांश: / दिवङ्गत स्वामी करपात्री… Read More

मनुस्मृतावधर्मनाशोल्लेखः? / मनुस्मृति में अधर्मनाश का उल्लेख है? / Destruction of adharma elucidated in Manu-smṛti? (In Hindi & Sanskrit)

  मनुस्मृतावधर्मनाशोल्लेखः? / मनुस्मृति में अधर्मनाश का उल्लेख है? / Destruction of adharma elucidated in Manu-smṛti? (In Hindi & Sanskrit)       १) “नाधर्मश्चारितो लोके सद्यः फलति गौरिव । शनैरावर्त्तमानस्तु कर्त्तुर्मूलानि कृन्तति ।।मनुस्मृति: ४.१७२ ।।“   महर्षिः मेधातिथिः — “आवर्त्त्यमानः कालेनोपचीयमानः कर्त्तुः प्रतिषिद्धानुष्ठातु: मूलाकृन्तति छिनत्ति । मूलकर्त्तनेन सर्वेण सर्वविनाश उपलक्ष्यते ।“ – यहाँ मूलोच्छेदन… Read More

करपात्रानुरागयोर्मतनिरसनम् / करपात्री स्वामी एवं कथावाचक अनुरागकृष्ण शास्त्री के मत का विखण्डन / Confutation of the views of Svāmī Karapātrī & Anurāgakṛṣṇa Śāstrī Kathāvācaka (Only Hindi & Sanskrit version)

  करपात्रानुरागयोर्मतनिरसनम् / करपात्री स्वामी एवं कथावाचक अनुरागकृष्ण शास्त्री के मत का विखण्डन   / Confutation of the views of   Svāmī Karapātrī & Anurāgakṛṣṇa Śāstrī Kathāvācaka (Only Hindi and Sanskrit version)       यह निबन्ध (अन्तर्जालीय पृष्ठसूत्र — https://goo.gl/xoZlpZ) स्वामी करपात्री के लिये सनातनी समाज को दिये नारे ‘अधर्म का विनाश हो’ – उसके उपर… Read More