आर्यसमाज के द्वारा श्रीमद्भागवतादि पुराणों में वर्णित नन्दनन्दन व्रजस्थ/गोकुलस्थ गोप-गोपीवृन्द के साथ रमण करने वाले श्रीश्यामसुन्दर कृष्ण के ऊपर किये गए आक्षेपो का आमूलचूल ध्वंस ।

  आर्यसमाज के द्वारा श्रीमद्भागवतादि पुराणों में वर्णित नन्दनन्दन व्रजस्थ/गोकुलस्थ गोप-गोपीवृन्द के साथ रमण करने वाले श्रीश्यामसुन्दर कृष्ण के ऊपर किये गए आक्षेपो का आमूलचूल ध्वंस । (This article was, originally, published in BRVF’s WhatsApp groups around 19th of June 2016 AD. But, due to plagiarism, it is being published here to show its true… Read More

Pātañjala-yoga-dārśanam + Advaitins + Laukika-nāṭya-śāstram + śuddha-bhakti-rasa-siddhāntaḥ of the Gauḍīyas/Caitanyāites (in Sanskrit, Hindi and English)

Pātañjala-yoga-dārśanam + Advaitins + Laukika-nāṭya-śāstram + śuddha-bhakti-rasa-siddhāntaḥ of the Gauḍīyas/Caitanyāites (in Sanskrit, Hindi and English) पातञ्जलसूत्रविनिर्दिष्टेश्वरस्य निर्विशेषत्वमयौक्तिकं निर्विशेषब्रह्माद्वैतवेदान्तिनां पक्षेऽपि / अद्वैतवेदान्तिनां पक्षे तु यत्कल्पितभक्तित्वं कल्पितद्वैतं तच्च निरस्तम् / लौकिकनाट्यशास्त्रस्यपञ्चमवेदत्वं निराकृतं भगवद्भक्तिरतेर्चिदानन्दरसमयत्वात्तद्भक्ते: भगवत्स्वरूपभूतह्लादिनीशक्तिपरिणतिविशेषत्वाच्च / पातञ्जलयोगसूत्रकथित ईश्वर के निर्विशेषत्व की अयौक्तिकता निर्विशेषब्रह्मवेदान्तियों के मत में भी / अद्वैतवेदान्तियों के द्वारा स्वीकृत कल्पितद्वैत व उस पर आश्रित कल्पितभक्तित्व… Read More

त्रिविधा अलौकिकी शृङ्गार-रति की परिभाषाओं व दृष्टान्तों के उपर विवेचन + माधुर्य एवं ऐश्वर्य की परिभाषा + पञ्चमुख्यभक्तिरसों में शृङ्गार का श्रेष्ठत्व / Elucidation on the definitions and examples of the triple divinely aesthetic erotic rati + the definitions of Mādhurya & Aiśvarya + the pre-eminence of Śṛṅgāra among all the five primary mellows of devotion

त्रिविधा अलौकिकी शृङ्गार-रति की परिभाषाओं व दृष्टान्तों के उपर विवेचन + माधुर्य एवं ऐश्वर्य की परिभाषा + पञ्चमुख्यभक्तिरसों में शृङ्गार का श्रेष्ठत्व / Elucidation on the definitions and examples of the triple divinely aesthetic erotic rati + the definitions of Mādhurya & Aiśvarya + the pre-eminence of Śṛṅgāra among all the five primary mellows of… Read More

श्रीमद्भागवतस्य ज्ञानसाधनत्वादपि परमुपादेयत्वं रसस्वरूपेण कैवल्यमभिव्याप्यत्वात्

श्रीमद्भागवतस्य ज्ञानसाधनत्वादपि परमुपादेयत्वं रसस्वरूपेण कैवल्यमभिव्याप्यत्वात् (केवल संस्कृत में / Only in Sanskrit)       १) प्रश्न: —   प्रमाणं नाम (यथावत्) ज्ञानसाधनमेव वा उत किमपि अन्यद्वैशिष्ट्यमस्ति वा ? प्रमाणस्य परमं प्रयोजनं किम् ?     १) उत्तरम् –   गौडवैष्णवमते तु श्रीमद्भागवतं प्रमाणममलमेतत्सम्प्रदायप्रवर्त्तकैः श्रीमच्चैतन्यदेवैः यच्च विनिर्दिष्टं यथा – “आराध्यो भगवान्व्रजेशतनयस्तद्धाम वृन्दावनं रम्या काचिदुपासना व्रजवधूवर्गेण… Read More

करपात्रमतनिरसनम् – चतुर्थांश: / करपात्रीय मत का अपगम – ४था भाग (अधिकांशत: संस्कृत आवृत्ति — किञ्चित् हिन्दी व गुरुण्डा/अङ्ग्रेजी/यावनी के संमिश्रण के साथ) / Refutation of the views held by Late Svāmī Karapātrī – 4th Pt. (Primarily Sanskrit version with a bit of Hindi and English interwoven)

करपात्रमतनिरसनम् – चतुर्थांश: / करपात्रीय मत का अपगम – ४था भाग (अधिकांशत: संस्कृत आवृत्ति — किञ्चित् हिन्दी व गुरुण्डा/अङ्ग्रेजी/यावनी के संमिश्रण के साथ) / Refutation of the views held by Late Svāmī Karapātrī – 4th Pt. (Primarily Sanskrit version with a bit of Hindi and English interwoven)           विद्वद्वर: विश्वासो वासुकि:… Read More

करपात्रानुरागयोर्वृथागल्पनिरास: — तृतीयांश: / दिवङ्गत स्वामी करपात्री एवं अनुरागकृष्णशास्त्री कथावाचक वृन्दावनीय के वृथा गल्प का निरास (दार्शनिक संस्कृत में) / Confutation of the views upheld by Late Karapātrī Svāmī & Anurāgakṛṣṇa Śāstrī Kathāvācaka Vṛndāvanīya (Only in philosophical Sanskrit)

करपात्रानुरागयोर्वृथागल्पनिरास: — तृतीयांश: / दिवङ्गत स्वामी करपात्री एवं अनुरागकृष्णशास्त्री कथावाचक वृन्दावनीय के वृथा गल्प का निरास (दार्शनिक संस्कृत में) / Confutation of the views upheld by Late Karapātrī Svāmī & Anurāgakṛṣṇa Śāstrī Kathāvācaka Vṛndāvanīya (Only in philosophical Sanskrit)       अनुरागार्भकस्य वृथा गल्प: —       करपात्रानुरागयोर्वृथागल्पनिरास: — तृतीयांश: / दिवङ्गत स्वामी करपात्री… Read More

वेदान्तप्रस्थान के उपर अद्यावधि उपलब्ध दार्शनिक सम्प्रदायों की सूची / Enumeration of the various theological doctrines so far available on Vedānta.

वेदान्तप्रस्थान के उपर अद्यावधि उपलब्ध दार्शनिक सम्प्रदायों की सूची / Enumeration of the various theological doctrines so far available on Vedānta. समग्रवेदान्तप्रस्थानस्य मूलाचार्या: कृष्णद्वैपायना: सात्यवतेया: बादरायणा: महामुनय: वेदव्यासा: उत्तरमीमांसात्मकब्रह्मसूत्राविर्भावका:।       (वेदान्तप्रस्थाने षोडशसिद्धान्ता: मुख्यरूपेण – तदितरविलुप्ताष्टादशवेदान्तसिद्धान्ता:) –   वैष्णवसम्प्रदायेष्वैतानि सप्तमतानि वेदान्तप्रस्थानोपरि —     क) रामानुजीय: विशिष्टाद्वैतवाद: अनन्यहर्युपासनात्मकं भक्तिमार्गमतम् — श्रीलक्ष्मणदेशिकानां श्रीभाष्यमनेकटीकोपटीकाभिः समलङ्कृतम् —… Read More

Severe logical taunting done on Western materialistic/animalistic/Communistic/Secularist beliefs bereft of Vedic spirituality

Severe logical taunting done on Western materialistic/animalistic/Communistic/Secularist beliefs bereft of Vedic spirituality Big achievements in material life minus spiritual progress is an ultimate zero as worth as a crow’s stool — a bitter fact — for, the quadruple materialistic acts of eating, sleeping, mating and defending are same in both 4 legged animals and a… Read More

Are all men created/born equal? Vedic vs. Abrahamic difference. – Pt. 1

Are all men created or born equal — Vedic vs. Abrahamic difference. – Pt. 1. Abrahamic difference. – Pt. 1

Universal harmony and global love without orthodox Vedic varṇāśrama? (Mostly English version) / पारम्परिक वैदिक वर्णाश्रम के बगैर वैश्विक शान्ति व प्रेम? (मुख्यत: गुरुण्डा/यावनी/अङ्ग्रेजी में)

Universal harmony and global love without Vedic varṇāśrama