Saibaba

क) धर्म को मनोरञ्जन का साधन मानना तथा देवीओं/देवताओं/भगवत्स्वरूपों (वेद/पुराण/तन्त्र के द्वारा प्रतिपाद्य इष्टदेवों) को केवल मनोकामना पूर्ति का साधन/यन्त्र/machine/tool मानना! Religion and spirituality are merely for ‘cheap entertainment’ and not for ‘divine enlightenment’!

 

ख) धर्मगुरुओं/धर्माचार्यों/सन्तों/महात्माओं से केवल दुनिया के सस्ते चमत्कार देखने/अनुभव करने की आशा रखना व उसीके लिये उनसे वास्ता जोडना! ब्रह्मविद्या/आत्मसाक्षात्कार/मोक्ष/आध्यात्मिक ज्ञान सब भाड में चला गया! बस जो करिष्मा दिखाये वही सच्चा गुरु! कुछ भभूति और स्वर्ण मुद्राओं को (जैसे कि निपुण ऐन्द्रजालिक जादुगर / black magician भी करते हैं) अपने हाथ या लम्बे केशों से निकाल कर दे दे वही सच्चा बाबा!

 

ग) हम जो माने वही धर्म है और हमारी इच्छाओं के अनुसार धर्म का स्वरूप परिभाषित होगा! हम हिन्दु तो इतने गिर चुके है कि यदि एक होचि होचि रेङ्ग्ने वाला गधा भी आकर हमारी ‘मन्नतें’ और ‘तम्मनाओं’ को पूरी कर दे तो दूसरे ही क्षण वो हमारा ईश्वर!

 

घ) यदि वेद/पुराण/श्रुति/स्मृति/आगम/निगम/तन्त्र आदि शास्त्रों के द्वारा प्रतिपादित श्रीविष्णु, राम, कृष्ण आदि भगवत्स्वरूप व अन्यान्य सूर्य, गणपति, रुद्र, शक्ति आदि देवी/देवता हम मनुष्यों की तुच्छ मनोकामनाओ को ‘फटाफट’ पूरा न कर सके, तो कोई बात नही! हम हिन्दु तो सौदेबाज व धोखेबाज लोग है न! हमारा भगवान् तो वही न कि जो हमारी लौकिक इच्छाओं को ‘झटपट’ पूरा करे! फिर चाहे हमें (वर्त्तमान में) पाकिस्तान स्थित (तत्कालीन अखण्ड भारत में स्थित) सिन्ध प्रान्त के गोमांसभक्षी म्लेच्छ (मुस्लिम) समुदाय में जन्मे एक पागल व्यक्ति को (जिसे उसीकी सिन्धी मुस्लिम सुन्नी बिरादरी ने कौम से बाहर कर दिया था उसके ‘मैं ही अल्ला हूँ’ – ‘अनालहक/अनालहक’ – पागलों की तरह ऐसा बकते रहने के कारण) — जो बाद में आकर तत्कालीन अखण्ड भारत के Bombay State (वर्त्तमान महाराष्ट्र राज्य) के शिरडी अञ्चल में पनाह लेकर जीवन को जैसे तैसे गुजारता रहा छोटे मोटे चमत्कारों को दिखाकर – ही ईश्वर के रूप में क्यों न पूजना पडे!

 

हमें कोई लाज थोडी न है! हम तो वैसे भी ८०० वर्ष मुगलों तथा २५० वर्ष विलायती फिरङ्गी म्लेच्छों/यवनों की दासता स्वीकार करते आये है! इस लम्बी दासता व गुलामी मानसिकता के कारण हमारे पास ‘स्वाभिमान’ जैसा तो कुछ वैसे भी कहाँ बचा है? So, let us leave the worship of Hindu (Sanātanī) demigods/demigoddesses/gods/goddess and let us worship this ‘rejected and ostracized (from his community more than 100 years back) Sindhi Sunni Muslim’ as our new god! And the wonder is we are still ‘Hindus’ and our worship to this new god is still to be considered as ‘Hindusim/Sanātana-dharma’. Wow! Bravo! Bravo!

 

What more is left? On the Rāma-navamī day, let us not visit Ayodhyāpurī and not take the darśanam of the deity of Lord Rāma; but, rather let us visit this so-called newly developed pilgrimage place called ‘Shirdi’ and instead take the darśanam of this ‘rejected Sindhi Muslim’ Sai Baba as our new ‘Sai Rāma’! Hail! Hurray! Cheers!

 

जो हमारी तुच्छ विष्ठा और मूत्र जैसी काली कलुटी फालतु और बकवासवाद से भरी हुई ‘क्षणिक इच्छाओं’ को पूरा करे वही हमारा ईश्वर है और वही हमारा धर्म है, फिर चाहे उसके लिये हमें सत्ययुग से चली आ रही सनातनधर्म की परम्पराओं का भले ही त्याग क्यों न करना पडे! भले ही सनातनी देवी/देवता/भगवत्स्वरूपों का त्याग क्यों न करना पडे! हम तो अपनी तुच्छ व क्षुद्र ‘इच्छाओं’ की पूर्ति के लिये अपने धर्म, परम्परा, और परम्परागत इष्टदेवताओं को भी एक झटके में छोड सकते है न! हम हिन्दुओं से और ज्यादा ‘अवसरवादी’ भला और कौन हो सकता है आज के समय में? हम हिन्दुओं से और अधिक ईमानदारी की भले क्या अपेक्षा रखी जा सकती है?

 

देखो! कैसे अवसरवादी है हम! अजी हमारे लिय तो धर्म एक व्यापार/सट्टा है न! आस्था और ‘life-long commitment’ का विषय थोडी! मुसलमान लोग अपने धर्म को, अपनी परम्पराओं को और अपने खुदा/अल्लाह को कभी नहीं त्यागेंगे भले ही उनकी सकाम इच्छाओं की पूर्ति उनका अल्लाह कर या न करे! ख्रिस्ति लोग अपने Jesus व God को कभी नही छोडेङ्गे भले ही उनकी इच्छाओं की पूर्ति उनके  Jesus की शरण में जाने से पूरी हो पाये या नही! पर हम हिन्दु तो ‘धर्म, परम्परा, इष्टदेव’ – इन सभी को रातोरात बेचने वाले महान् स्वार्थी व्यापारी अवसरवादी ‘चालु’ लोग हैं न! और वैसे भी अजमेर शरीफ़ स्थित सूफ़ी संत हजरत मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह को कोई मुसलमान ‘ईश्वर/अल्लाह/खुदा’ के रूप में थोडी न पूजता है! इधर हम हिन्दु तो इस ‘निष्कासित सिन्धी मुस्लिम साईबाबा’ को तो अब ‘भगवान् राम जो कि सनातन परब्रह्म है’ – उनके रूप में पूज रहे हैं न!

 

ङ) क्यों? क्योंकि हम मानते हैं कि ‘जो हमें ठीक लगे वही धर्म है’! जबकि मुस्लिम, ख्रिस्ति, बौद्ध आदि केवल उसे ही धर्म/धम्म/religion/मज़हब मानते है जो कि उनके धर्मशास्त्रों में लिखा है! Why? Because, we retarded, cursed and damn Hindus think that religion is not made by God and is not to be governed by scriptures; but, rather by the ‘public opinion / vox populi’! Whereas, the Muslims and Christians etc. consider Islam and Christianity to be absolutely governed by their scriptural monarchy (Bible or Koran) and not by either anarchy (उच्छ्रिन्खलता/मनमौजी स्वेच्छाचारी मनस्विता) and not even by democracy (लोकतन्त्र/public opinion). Public opinion of Muslims and Christians cannot overturn the fundamental beliefs of their faiths. But, here, in Hinduism, alas! the pity is, that the public opinion can make new gods and can outdate the traditional scripturally established gods. And if any conventionally accepted ‘dharmaguru/dharmacarya’ of Sanātana-dharma raises his protest against this newly injected heterodoxy, we shall burn his effigies all around and shall condemn him with raising slogans!

 

च) Indeed, this is the reason why the oldest religion on Earth viz. Hinduism/Sanātana-dharma has been degraded to the 3rd largest religion on Earth (at present) and the very reason why Islam is the fastest growing religion and the Christianity the religion with most number of followers! No wonder! No surprise! Hail! Hail! Victory! Let it continue like this! Let Hinduism shrink to the bottom! Let newly risen heretic morons be treated as new ‘up to date Gods’ and thus, let them replace the conventional Gods like Śrī Rāma and Śrī Kṛṣṇa! The fate of us Hindus is certainly gloomy and meant to be doomed upon every succeeding day, right! Yup! Oh yeah!

 

छ) हमारा सनातनधर्म व भारतवर्ष पूरे ब्रह्माण्ड का जगद्गुरु/विश्वगुरु था उस समय कि जब हमने (सत्ययुग की बात है) महर्षि विश्वामित्र के द्वारा कृत्रिम स्वर्गलोक (artificially created heavenly plane) की सृष्टि किये जाने पर भी (इतनी सामर्थ्य होने पर भी) उस मनुष्य विश्वामित्र को केवल एक महान् योगी के रूप में ही स्वीकार किया! भगवान्/ईश्वर/परमात्मा/परब्रह्म के रूप में कदापि नही!

 

ज) Our Sanatanadharma and Bhāratavarṣa was reigning victorious in all the three worlds (त्रिलोकी में) when in Satyayuga, though Maharṣi Agastya drank the whole salty water ocean of Earth into his stomach (कुम्भोदर अगस्त्य ऋषि) by turning his abdomen into the great pot container for the ocean water – he was not worshipped as God or Absolute by the fellow Sanātanadharmīs – despite showing such a great miracle!

 

झ) तो हमारा प्रश्न यह है कि इनमें से कौनसा चमत्कार करने/दिखाने की हैसीयत/औकात/सामर्थ्य इस बहिष्कृत सिन्धी मुस्लिम साई बाबा में थी कि उसको ईश्वर के रूप में और प्रभु श्री राम के रूप में पूजा जा रहा है रामनवमी के दिन? क्या ये लौण्डा समुद्र को सूखा सकता है जैसे कि प्रभु श्री राम करने वाले थे समुद्रदेव के द्वारा प्रारम्भ में रास्ता न दिया जाने पर? क्या ये छोरा महर्षि अगस्त्य की तरह समुद्रका पान कर सकता है व विश्वामित्र की तरह स्वर्ग की रचना कर सकता है? वो कर भी दे तो उसका स्थान एक महर्षि से अधिक थोडी न हम मानेङ्गे! ईश्वर? सपने में भी नही हो सकता ये शख्स हमारा!

 

ञ) इस ‘साई’ लौण्डे में इतनी ही ताकत थी तो दिखा दिया होता अपना दमखम इसने भारत की पवित्र भूधरा पर से ‘गौहत्या’ रूपी कलङ्क को समाप्त करवा कर! और आज भी जिस राज्य महाराष्ट्र में इसकी पीठ बनी हुई है वहा इतना अकाल और सूखा क्यों पड रहा है? इस सिरफिरे लौण्डे से तो भारत के राजनेता व सरकार अच्छी है जो कि कम काम १० लाख litres पानी तो पहुँचा रही है अकालग्रस्त क्षेत्र में!

 

अतः हे साईभक्त हिन्दुओं! भेडचाल को छोड कर (एक बकरा गया आगे तो दुसरे सौ बकरे उसके पीछे पीछे चल दिये) अपनी बुद्धि को ठीकाने रखो नहीं तो लातो के भूत बातों से नही मानते ये बात भी हम अच्छी तरह से जानते है! हमारे नहीं तो यमराज के डण्डों को खाने के लिये सज्ज रहो क्योंकि मनुष्य की ईश्वर के रूप में पूजा करने वालों की नियति केवल यमराज का मुद्गर तय करता है!

 

 

— कट्टर सनातनी भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर के द्वारा चुलबुली भाषा में तैय्यार किया गया वङ्ग्यात्मक लेख बुद्धुओं व नकटों को समझाने के लिये

 

Link — https://goo.gl/El1HAn

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s