श्रीमद्भागवत का अभूतपूर्व माहात्म्य — भाग १ –

 

 

 

जिस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण का सर्वोत्तमत्त्व एक अनादिकालीन विवाद का विषय रहा है, ठीक उसी प्रकार से श्रीमद्भागवतशास्त्र का सर्वोत्कर्ष भी – जो कि उन श्रीहरि का प्रतिपादक है । अन्य किसी वैदिक देव व अन्य किसी पुराण पर इतने आक्रमण नहीं हुए है विपक्षी गुटों के द्वारा — एक तथ्य जो अपने आप में उन दोनों की सर्ववरीयता को सिद्ध करता है – क्योंकि शास्त्रों में अनेक बार असुरों के द्वारा पालित हरिविद्वेष का वर्णन प्राप्त होता है । यदि श्रीहरि एक सामान्य प्राणी होतें व श्रीमद्भागवत एक सामान्य ग्रन्थ होता, तो ऐसा विद्वेष आधारहीन हो जाता । अतः सच्छास्त्र, प्रामाणिक इतिहास, अनुमान व श्रीहरि के श्रेष्ठतम भक्त — यें सभी उन श्रीभगवान् के साथ खड़े है असच्छास्त्रों, अप्रामाणिक तथ्यों, विकृत इतिहास व नास्तिक तर्कों के उन्मूलनार्थ । मन में यह आग्रह रख कर गौडीयवेदान्ताचार्य श्रील बलदेव विद्याभूषणपाद ने ‘सिद्धान्तदर्पण:’ का प्रणयन किया है, जो कि एक मूल प्रकरण ग्रन्थ है कि जिसके द्वारा शब्दब्रह्मात्मक श्रीमद्भागवतशास्त्र के याथार्थ्य का प्रस्तुतिकरण होता है व उसके प्रामाण्य के विरूद्ध उपस्थापित समस्त कुतर्कों का निरसन होता है ।

 

 

 

— भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर आचार्य श्री गुरुपाद

(आणन्द, गुजरात, भारत)

 

 

***

 

 

 

Unprecedented glory of Śrīmad-bhāgavatam – Pt. 1 –

 

 

 

Just as the supremacy of Lord Kṛṣṇa is an object of timeless controversy, so is the authority of the scripture that depicts Him: the Śrīmad-bhāgavatam. No other Vedic personality and no other Purāṇa has been so much attacked by opposing groups — a fact which itself evinces the superiority of both, for the scriptures often describe the particular envy the demons feel towards Sri Hari. Such envy would be baseless if He were a common being and the Śrīmad-bhāgavatam a common treatise. Hence, scriptures, history, logic and Lord Kṛṣṇa’s exalted devotees stand by Him to dismantle all bogus texts, false evidences, fallacies and agnostic arguments. With this in mind, Gauḍīya-vedāntācarya Śrīla Baladeva Vidyābhūṣaṇa compiled the Siddhānta-darpaṇaḥ, an original text that presents the Śrīmad-bhāgavatam as the sound form of Sri Hari and, thus, defeats several objections against its authenticity.

 

 

 

— Bhaktirasavedāntapīṭhādhīśvara Ācārya Śrī Gurupāda

(Anand, Gujarat, Bhārata)

 

 

 

सूत्र / Link — https://goo.gl/C86icM

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