भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर आचार्य श्री गुरुपाद निज शुभाशीष प्रदान करते है सहयोगी प्राचार्य श्री राजेन्द्र त्रिपाठी ‘रसराज’ जी के प्रति (इलाहाबाद विश्वविद्यालय — तीर्थराज प्रयाग, पूर्वी उ.प्र., भारत) जिन्होंने गौडीयवैष्णवाचार्य श्रीरूपगोस्वामिपाद (१६वीं शताब्दी ईसा पश्चात्) की अप्राकृत रसशास्त्र के अन्तर्गत आनेवाली छह अमरकृतियों (संस्कृत भाषा में प्रणीत) — विदग्धमाधवम्, ललितमाधवम् और दानकेलिकौमुदी (नाट्यकृतियाँ) + भक्तिरसामृतसिन्धु, उज्ज्वलनीलमणि एवं नाटकचन्द्रिका की नाट्यशास्त्र के परिप्रेक्ष में शास्त्रीय समीक्षा पर आधारित शोधपरक ग्रन्थ का प्रणयन कर पुंखानुपुंख विश्लेषण किया है । गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय के इन बहूमूल्य ग्रन्थों पर जो उन्होंने आलोचना की है उसके लिये वें हमारी ओर से धन्यवादार्ह है ।

 

Bhaktirasavedāntapīṭhādhīśvara Ācārya Śrī Gurupāda allots His Holiness’s blessings and well-wishes to the Associate Professor (University of Allahabad — Prayāga, East, UP, IN) Dr. Rajendra Tripathi ‘Rasraj’ Jī for his research analytical work on the six classical treatises by Gauḍīya-vaiṣṇavācārya Śrīla Rūpa Gosvāmipāda (in Sanksrit – 16th Century CE) viz., Vidagdha-mādhavam, Lalita-mādhavam and Dāna-keli-kaumudī (dramatic works) + Bhakti-rasāmṛta-sindhu, Ujjvala-nīlamaṇi & Nāṭaka-candrikā – on the basis of the nāṭya-śāstra. For such a research work on these invaluable treatises, his endeavour is heartily applauded and is fervently congratulated from our side.

 

Facebook link of the said Professor / उक्त प्राचार्य का मुखपुस्तिका सूत्र — https://www.facebook.com/rajendra.rasraj

सूत्र / Link — https://goo.gl/V2uXu3

 

— भ.र.वे.प्र. का सचिवालय / BRVF’s Secretariat

 

 

 

 

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