६-१७पाठानां प्रश्नमालेयम् समूहस्य सदस्यानां कृते / ६-१७ पाठों की यह प्रश्नमाला समूह के सदस्यों के लिये / Question series on the 6-17th lessons for the group participants.

 

सूचना/Notice –

 

ये सदस्यजनाः निम्नोद्धृतप्रश्नानां समीचीनोत्तरान् दास्यन्त्यग्रिमद्विसप्ततितमायां घटिकायां, तान् समस्तान् प्रौढप्रज्ञजनान् प्रति श्रीमदाचार्यगुरुपादा: तारतम्यमूलका: उत्तीर्णाङ्का: दास्यन्ति प्रतिपाठानान्तरम् ।

 

जो सदस्यजन निम्नलिखित प्रश्नों का समीचीन उत्तर प्रदान करेङ्गे अगले बहत्तर घण्टों के भीतर, उन समस्त प्रौढमतिवान् सदस्यों के प्रति श्रीमदाचार्यचरण तारतम्य से उत्तीर्ण अङ्क देङ्गे प्रति पाठ के पश्चात् ।

 

Those participants who will provide proper satisfactory answers to the below produced queries within next seventy two hours, such intellectually grown participants shall be given passing grades with hierarchical gradation by Ācārya Śrī Gurupāda after every consecutive lesson.

 

 

 

१/1) वेदान्तसूत्रेषु ब्रह्म केन प्रकारेण निरूपितम्? अन्यान्यवेदसमूहेषु ब्रह्म केन प्रकारेण निरूपितम्? शास्त्रेषु ब्रह्मणः किमर्थमवाच्यत्वम्? आत्यन्तिकावाच्यत्वपक्षे ब्रह्मणः को दोषः स्यात्?

 

वेदान्तसूत्रों में ब्रह्म किस प्रकार से निरूपित हुआ है? दूसरे वेदादि शास्रों में ब्रह्म किस प्रकार से निरूपित है? शास्त्रों में ब्रह्म को अवाच्य क्यों कहा गया? ब्रह्म को आत्यन्तिक रूप से अवाच्य मानने पर कौन सा दोष लगता है?

 

In the Vedānta-sūtras, brahma is depicted in which manner? In the other Vedic literature, brahma is expounded in which way? The non-expression of brahma as mentioned in the scriptures indicates what? What fault is incurred upon consideration of brahma as ultimately non-expressible?

 

 

२/2) ब्रह्मज्ञानं भक्तिपदवाच्यं कथं केन शास्त्रप्रमाणेन च? ब्रह्मज्ञानस्य विषयनिर्विषयात्मकद्वन्दवर्ज्जितत्त्वस्य को आशयः?

 

ब्रह्मज्ञान को ‘भक्ति’ शब्द का वाच्यार्थ क्यों माना गया है? व उसका शास्त्रप्रमाण क्या है? ब्रह्मज्ञान को विषय + निर्विषय – इन दोनों द्वन्द्वों से वर्ज्जित कहने का क्या आशय है?

 

Why the knowledge about brahma (brahma-jñānam) is considered the ‘directly expressed meaning’ (vācyārtha) of ‘bhakti’ (devotion)? And what scriptural evidence proves it? What is the intention for asserting the transcendence of brahma-jñāna in regards the objectivity and non-objectivity of knowledge (viaya-nirviayātmaka-dvandva-parihāra)?

 

 

३/3) वर्त्तमानकाले जगतः असत्यकथनेन शास्त्रेषु को अभिप्रायः? सृष्टेः प्रागेव जगतः असत्यकथनेन शास्त्रेषु को अभिप्रायः?

 

जगत् को वर्त्तमान काल में ‘असत्य’ उद्घोषित करने के पीछे शास्त्रों का क्या अभिप्राय है? सृष्टि से पूर्व जगत् को ‘असत्य’ कहने के पीछे शास्त्रों का क्या अभिप्राय है?

 

During the grossly existential stage of the creation, what is the intention of the scriptures after terming the phenomenal (perceptible) world as ‘unreal’ (asatya)? What is the scriptural intention behind consideration of the world as unreal especially, before the perceptible creation (of the world)?

 

 

४/4) भेदस्य तात्त्विकत्वं केन युक्त्याधारेण प्रमाणितम्? व्यावहारिकप्रातिभासिककाल्पनिकपारमार्थिकसत्तानाम् कः अर्थः? जीवजगद्भ्यां साकं परब्रह्मणः एकतासूचकानां वाक्यानां को आशयः? ब्रह्माधीनसत्तायाः को आशयः? वागादीन्द्रियानां प्राणेन साकं को सम्बन्ध:? केचिज्जनानां मते केन हेतुना जगज्जीवयोः ब्रह्मात्त्वकत्त्वेन निर्देशः?

 

भेद की वास्तविकता किस युक्ति के आधार पर प्रमाणित होगी? व्यावहारिकी, प्रातिभासिकी, काल्पनिकी तथा पारमार्थिकी सत्ताओं का क्या अर्थ है? जीव व जगत् के साथ परब्रह्म के एकत्व सूचक वाक्यों का क्या आशय है? ब्रह्माधीनसत्ता क्या का अर्थ है? वाणी आदि इन्द्रियों का प्राण के साथ कौन सा सम्बन्ध है? कतिपय व्यक्तिओं के मत में किस कारण से जगत्+जीव का ब्रह्म के साथ एकत्व निर्देशित हुआ है?

 

The factuality of distinction (dvaita/bheda-vāstavikatā) shall be verified on the basis of what logic? What is the meaning of the quadruple phases of existence or realities viz., ‘common worldly’ (vyāvahārikī), ‘appearing’ (prātibhāsikī), ‘kālpanikī’ (imaginary) and the ‘ultimately essential’ (pāramārthikī)? What is the implication of the statements asserting the identity/oneness of the jīvas and jagat with the brahma? What is the relation of the senses beginning with speech (vāg-indriya) – with the vital air (prāṇa-vāyu)? What is meant by considering the subservient existence to brahma (brahmādhīna-sattā)? In the opinion of many, for what reason the oneness of the jagat and jīvas with brahma has been described by the scriptures?

 

 

५/5) प्रतिबिम्बवादो कः? तस्य खण्डने मुख्या युक्तिः का? परिच्छेदवादो कः? तस्य निरसने मुख्या युक्तिः का? अद्वैतवादो कः? अद्वैते द्वैतस्वीकारेण का आपत्तिः? अद्वैते अद्वैतस्वीकारेण का विषमता? सिद्धसाधनता दोषो कः? तस्य लौकिकोदाहरणम्? ब्रह्मणि तदुहारणस्य कथं प्रयोगः?

 

प्रतिबिम्बवाद क्या है? उसके खण्डन में मुख्य युक्ति क्या है? परिच्छेदवाद क्या है? उसके निरसन में मुख्य युक्ति क्या है? अद्वैतवाद क्या है? अद्वैत में द्वैत स्वीकार करने पर क्या आपत्ति खडी होती है? अद्वैत में अद्वैत को स्वीकार करने पर क्या विषमता जन्म लेती है? सिद्धसाधनता दोष क्या है? उसका लौकिक उदाहरण? ब्रह्म में उस उदाहरण का प्रयोग कैसे होगा?

 

What is the theory of reflection (pratibimba-vāda)? What is the main logic for cutting asunder the said theory? What is the theory of division (pariccheda-vāda)? Which logic is employed to confute it? What is the theory of non-dualism (advaita-vāda)? What problem arises by accepting duality (dvaita) in the non-dualism/advaita? What inconsistency arises by accepting advaita in advaita? What is meant by the ‘siddha-sādhanatā-doa’ or the fault of perfecting the ever perfect? What is its mundane example? How is this fault applicable in the context of brahma?

 

 

६/6) कैः हेतुभिः निर्विशेषब्रह्म प्रमाणत्रयमगोचरमस्ति? तद्ब्रह्मणि भागलक्षणावृत्तेरसम्भावना कथं? भागलक्षणायाः अपरनाम किम्? अद्वैतवादो कथमग्राह्यः?

 

किन हेतुओं से निर्विशेषब्रह्म तीनो प्रमाणों के अगोचर बन जाता है? उस निर्विशेष ब्रह्म में भागलक्षणा वृत्ति की असम्भावना कैसे है? भागलक्षणा का पर्यायवाची नाम क्या है? अद्वैतवाद क्यों ग्रहण करने योग्य नहीं है?

 

Due to which reasons the non-specified (nirviśea-brahma) Absolute turns non-objective to the triple evidence (pratyaka / directly perceptive, anumāna / intellectual inference and apaurueya śabda / immortal Vedic sound)? How is the inapplicability of the ‘bhāga-lakaṇā’ justified in the context of brahma? What is the synonymous term for ‘bhāga-lakaṇā’? Why the theory of non-dualism (advaita-vāda) is unacceptable?

 

 

 

  • भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वराः आचार्यश्रीः गुरुपादाः / भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर आचार्य श्री गुरुपाद / Bhaktirasavedāntapīṭhādhīśvara Ācārya Śrī Gurupāda

 

 

सूत्रम् / सूत्र / Link –

 

https://goo.gl/AG9krt

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